
फतेहपुर। आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आयोजित किए जा रहे प्रशासनिक सहयोग शिविरों की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। शिविर में ग्रामीणों से आवेदन तो लिए जा रहे हैं, लेकिन आवेदन के बाद कार्रवाई नहीं होने से फरियादी परेशान हैं। ऐसा ही एक मामला मोरहे गांव से सामने आया है, जहां पईन की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने को लेकर दिए गए आवेदन पर एक महीने से अधिक समय बाद भी जांच नहीं होने का आरोप है।
मोरहे गांव निवासी विकास कुमार ने 18 अगस्त 2026 को सहयोग शिविर में अंचलाधिकारी, फतेहपुर के नाम आवेदन देकर गांव के पईन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की थी। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पईन की जमीन पर कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर घर बनाकर अतिक्रमण किया गया है। इससे पानी के निकास में परेशानी होने के साथ ग्रामीणों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
आवेदक का कहना है कि शिविर में आवेदन देने के बावजूद अब तक मामले की स्थल जांच नहीं कराई गई है। न ही अतिक्रमण की स्थिति को लेकर कोई कार्रवाई हुई है। ऐसे में शिकायतकर्ता कार्यालय और अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर है।
सिर्फ आवेदन लेने तक सीमित तो नहीं रह गया शिविर?
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन द्वारा सहयोग शिविर लगाने का उद्देश्य लोगों की समस्याओं को मौके पर सुनना और उनके समाधान की दिशा में कार्रवाई करना है। लेकिन यदि शिविर में आवेदन लेने के बाद उसे फाइलों में ही दबा दिया जाए और जांच तक नहीं हो, तो ऐसे शिविरों के आयोजन का उद्देश्य ही सवालों के घेरे में आ जाता है।
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि कहीं शिविर महज औपचारिकता पूरी करने और कागजी तौर पर कार्रवाई दिखाने तक सीमित तो नहीं रह गए हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारियों को शिविर में प्राप्त आवेदनों की समीक्षा कर लंबित मामलों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।
अब देखना होगा कि मोरहे गांव की इस शिकायत पर संबंधित अधिकारी कब तक जांच कराते हैं और कथित अतिक्रमण को लेकर क्या कार्रवाई होती है।













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