
फतेहपुर। गया जिले के फतेहपुर प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय पतया में मूल चयनित अभ्यर्थी के स्थान पर दूसरी महिला द्वारा कथित रूप से फर्जी तरीके से शिक्षिका के पद पर कार्य करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में मोचरक गांव निवासी आशीष कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री को आवेदन भेजकर मामले की उच्चस्तरीय निगरानी जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत को बिहार सरकार के आरटीपीएस पोर्टल पर भी दर्ज कराया गया है, जहां से मामले को कार्रवाई के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी, गया के पास अग्रसारित किया गया है।
शिकायतकर्ता ने आवेदन में आरोप लगाया है कि प्राथमिक विद्यालय पतया में 26 फरवरी 2022 को ‘ललवी कुमारी’ के नाम से शिक्षिका के पद पर नियुक्ति हुई थी। हालांकि, आरोप है कि विद्यालय में मूल चयनित अभ्यर्थी ललवी कुमारी के स्थान पर गीता देवी द्वारा ‘ललवी कुमारी’ के नाम से शिक्षिका के रूप में कार्य किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले को फर्जी नियोजन और पहचान से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए संबंधित दस्तावेजों की जांच की मांग की है।
पति के शिक्षक और बीएलओ होने का भी लगाया आरोप
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि गीता देवी के पति फूलचंद स्वयं शिक्षक हैं और क्षेत्र में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के रूप में भी कार्यरत रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनके द्वारा अपने पद का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए अभिलेखों में हेरफेर करने और फर्जी तरीके से पहचान स्थापित करने का प्रयास किया गया। आवेदन में तत्कालीन पंचायत सचिव की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2022 में शिक्षिका के नियोजन के दौरान पंचायत स्तर पर तैयार किए गए अभिलेखों की जांच की जाए तो पूरे मामले का खुलासा हो सकता है। आवेदन में नियोजन से संबंधित दस्तावेज, मतदाता सूची, भूमि अभिलेख और अन्य सरकारी रिकॉर्ड को जांच के दायरे में लेने की मांग की गई है।
भूमि दस्तावेजों में अलग-अलग नाम का दावा
शिकायत में एक महत्वपूर्ण बिंदु भूमि अभिलेखों को भी बनाया गया है। आवेदन के अनुसार, फतेहपुर और मोचरक क्षेत्र में संबंधित परिवार के नाम से दर्ज जमीन के दस्तावेजों में अलग-अलग नाम दर्ज हैं। शिकायतकर्ता ने गीता कुमारी/गीता देवी, ललवी कुमारी तथा अन्य संबंधित नामों से जुड़े भूमि अभिलेखों और जमाबंदी की जांच कराने की मांग की है।
आवेदन में खाता संख्या और प्लॉट संख्या का भी उल्लेख करते हुए राजस्व अभिलेखों से वास्तविक पहचान का मिलान कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि भूमि अभिलेख, मतदाता सूची, नियोजन संबंधी दस्तावेज और विद्यालय के रिकॉर्ड का मिलान कराने पर कथित फर्जीवाड़े की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने कथित रूप से शिक्षिका के रूप में कार्य कर रही महिला की शैक्षणिक योग्यता और प्रशिक्षण संबंधी प्रमाणपत्रों की भी जांच कराने की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि संबंधित महिला की वास्तविक शैक्षणिक योग्यता और नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जाना आवश्यक है।
साथ ही, जिस नाम से शिक्षिका का नियोजन हुआ और जो महिला विद्यालय में कार्यरत रही, दोनों की पहचान का आधार, फोटो, हस्ताक्षर, आधार/मतदाता पहचान सहित अन्य दस्तावेजों का मिलान कराने की मांग की गई है।
निगरानी जांच और सरकारी राशि की वसूली की मांग
मुख्यमंत्री को दिए गए आवेदन में शिकायतकर्ता ने मामले की उच्चस्तरीय निगरानी जांच (Vigilance Probe) कराने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि फर्जी शिक्षिका के कथित नियोजन से संबंधित सभी मूल दस्तावेजों, हस्ताक्षर, फोटो और अभिलेखों की राज्य स्तरीय अथवा निगरानी विभाग से जांच कराई जाए।
इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षिका, तत्कालीन पंचायत सचिव, शिक्षक सह बीएलओ तथा अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ बीएनएस/आईपीसी एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही कथित रूप से सरकारी सेवा के दौरान प्राप्त वेतन एवं अन्य सरकारी राशि की भी वसूली की मांग की गई है।
आरटीपीएस पोर्टल पर दर्ज हुई शिकायत
दस्तावेज के अनुसार, शिकायतकर्ता आशीष कुमार ने यह मामला बिहार सरकार के ‘संतोष निवारण एवं शिकायत निवारण प्रणाली’ (RTPS) पोर्टल पर दर्ज कराया है। शिकायत का पंजीकरण संख्या R#F7659## बताया गया है। आवेदन पर 24 अगस्त 2026 की तिथि दर्ज है। शिकायत को कार्रवाई के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी, गया के पास भेजा गया है।
अब इस मामले में शिक्षा विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच और संबंधित पक्षों से पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्राथमिक विद्यालय पतया में मूल चयनित अभ्यर्थी के स्थान पर दूसरी महिला के कार्य करने का आरोप कितना सही है। फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।













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