बिहार आपूर्ति सेवा संघ का सांकेतिक विरोध शुरू, 26 अगस्त तक काली पट्टी लगाकर काम करेंगे अधिकारी

गया। वर्षों से लंबित मांगों, मूलभूत संसाधनों की कमी और राशन कार्ड अभियान में सामने आ रही व्यावहारिक एवं तकनीकी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने गुरुवार से सांकेतिक विरोध शुरू कर दिया है। संघ के पदाधिकारी 20 से 26 अगस्त तक काली पट्टी लगाकर अपने कार्यों का निर्वहन करेंगे। संघ ने स्पष्ट किया है कि विरोध के दौरान सरकारी कार्य और जनहित से जुड़ी सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी।

संघ के अनुसार सांकेतिक विरोध का उद्देश्य सरकार और विभाग का ध्यान लंबे समय से लंबित मांगों की ओर आकृष्ट कराना है। पदाधिकारी नियमित रूप से राशन कार्ड, खाद्यान्न वितरण और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कार्य करते रहेंगे। संघ ने कहा कि किसी भी स्थिति में आम लोगों को परेशानी पहुंचाना या सरकारी योजनाओं को बाधित करना उसका उद्देश्य नहीं है।

प्रखंड स्तर पर संसाधन उपलब्ध कराने की मांग।

संघ ने प्रत्येक प्रखंड में विभागीय वाहन उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ ही आपूर्ति कार्यालयों में कंप्यूटर, इंटरनेट, फर्नीचर सहित अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई है। संघ का कहना है कि पर्याप्त संसाधनों के अभाव में अधिकारियों को विभागीय कार्यों के निष्पादन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

वेतनमान में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने, नवंबर 2023 से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने और करीब 18 वर्षों से लंबित कैडर पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी करने की मांग भी संघ ने की है।

राशन कार्ड अभियान में लक्ष्य को लेकर चिंता।

वर्तमान में चल रहे राशन कार्ड अभियान को लेकर भी संघ ने कई व्यावहारिक समस्याओं की ओर विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया है। संघ के मुताबिक राज्य में करीब 11.04 लाख नए राशन कार्ड बनाए जाने हैं। इसके लिए प्रतिदिन लगभग 36,814 कार्ड तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

अभियान के तहत आवेदन प्राप्त करने के बाद पात्रता की जांच, स्थलीय सत्यापन, ऑनलाइन प्रविष्टि, ई-केवाईसी तथा आधार और मोबाइल सीडिंग जैसे कई स्तरों पर कार्य किया जा रहा है। संघ का कहना है कि इतने बड़े अभियान के लिए पर्याप्त मानव संसाधन और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।

अधिकारियों के निजी खर्च का भी उठाया मुद्दा।

संघ ने दावा किया है कि संसाधनों की कमी के कारण राशन कार्ड अभियान के दौरान अधिकारियों को अपनी जेब से भी खर्च करना पड़ रहा है। संघ के अनुसार एक कार्ड के काम में करीब 250 से 300 रुपये तक का निजी खर्च अधिकारियों को वहन करना पड़ रहा है। संघ ने सरकार से अभियान के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ तकनीकी समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग की है।

संघ ने राशन कार्ड अभियान के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी करने की भी मांग की है, ताकि अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्य पूरा करने में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

वेतन कटौती की कार्रवाई वापस लेने की मांग।

संघ ने 17 जुलाई 2026 को मोबाइल/CUG संपर्क और GPS लाइव लोकेशन से संबंधित कार्रवाई का मामला भी उठाया है। संघ के अनुसार इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों और आपूर्ति निरीक्षकों के एक दिन के वेतन की कटौती की गई। संघ ने इस कार्रवाई को वापस लेने की मांग की है।

डीएम, डीएसओ और एसडीएम को दी गई सूचना।

बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने कहा कि सांकेतिक विरोध की पूर्व सूचना खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अलावा सभी जिलों के डीएम, डीएसओ और एसडीएम को दी जा चुकी है। संघ को उम्मीद है कि सरकार और विभाग कर्मचारियों की लंबित मांगों और कार्यस्थल की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए सकारात्मक निर्णय लेंगे।

संघ ने कहा कि काली पट्टी लगाकर विरोध जताने के बावजूद आपूर्ति सेवा से जुड़े सभी नियमित कार्य और आम लोगों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं पूर्व की तरह जारी रहेंगी। संघ का कहना है कि मांगों का समाधान होने पर विभागीय कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी।