जहानाबाद में फर्जी जांच का खुलासा, आईजी विकास वैभव ने अंचल निरीक्षक और अनुसंधानकर्ता को किया सस्पेंड।

जहानाबाद/गया। मगध क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव ने जहानाबाद नगर थाना के एक चर्चित मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर अंचल पुलिस निरीक्षक रघुनाथ प्रसाद और अनुसंधानकर्ता पु.स.अ.नि. श्रीकांत कुमार सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दोनों अधिकारियों पर कांड के अनुसंधान और पर्यवेक्षण में घोर लापरवाही, मनमानी, पक्षपातपूर्ण कार्रवाई तथा बिना पर्याप्त साक्ष्य के एक युवक को जेल भेजने का आरोप सिद्ध होने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

मामला जहानाबाद नगर थाना कांड संख्या 336/25 से जुड़ा है। महमदपुर निवासी रिषु राज ने पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव को आवेदन देकर आरोप लगाया था कि 24 फरवरी 2025 को उसके साथ मारपीट हुई थी और उसने नगर थाना में शिकायत भी दी थी, लेकिन उसकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इसके विपरीत, विपक्षी पक्ष द्वारा दायर एक कोर्ट परिवाद के आधार पर लगभग दो माह बाद दर्ज कांड में उसे ही आरोपी बना दिया गया।

रिषु राज ने आरोप लगाया कि मामले के अनुसंधानकर्ता द्वारा उससे 30 हजार रुपये की मांग की गई थी। रकम नहीं देने पर उसे हत्या के प्रयास की धारा में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी गई। बाद में बिना किसी ठोस साक्ष्य, जख्म जांच प्रतिवेदन अथवा पर्याप्त अनुसंधान के उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

समीक्षा में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं

पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव ने स्वयं मामले की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। जांच में पाया गया कि कोर्ट परिवाद दर्ज कराने वाले व्यक्ति को ही यह जानकारी नहीं थी कि उसके परिवाद पर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है, जबकि केस डायरी में उसके बयान दर्ज होने का उल्लेख किया गया था। इससे अनुसंधान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
जांच में यह भी सामने आया कि बिना किसी जख्म जांच रिपोर्ट, वैज्ञानिक साक्ष्य या पर्याप्त गवाहों के बयान के ही मामले को गंभीर अपराध की श्रेणी में सत्य मान लिया गया और आरोपी बनाकर रिषु राज को जेल भेज दिया गया।

समीक्षा के दौरान अनुसंधानकर्ता ने बताया कि नगर अंचल निरीक्षक रघुनाथ प्रसाद के निर्देश पर ही कार्रवाई की गई थी। वहीं यह भी पाया गया कि अंचल निरीक्षक ने घटनास्थल का निरीक्षण तक नहीं किया और कांड दर्ज होने के लगभग नौ माह बाद भी केवल कागजी समीक्षा के आधार पर अपनी टिप्पणी दे दी।

तत्कालीन थानाध्यक्ष की भूमिका भी जांच के दायरे में

मामले की समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि रिषु राज ने 24 फरवरी 2025 को अपने साथ हुई मारपीट की शिकायत नगर थाना में दी थी, लेकिन तत्कालीन थानाध्यक्ष दिवाकर विश्वकर्मा ने उस आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले में पुलिस अधीक्षक को अलग से जांच कर यह पता लगाने का निर्देश दिया गया है कि आखिर प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं की गई। दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

आईजी विकास वैभव ने दिए कड़े संदेश

मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव ने कहा कि अनुसंधान में लापरवाही, पक्षपातपूर्ण रवैया अथवा कानून के विपरीत की गई कोई भी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की जिम्मेदारी निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित करना है, न कि किसी निर्दोष व्यक्ति को बिना पर्याप्त साक्ष्य के जेल भेजना।
उन्होंने नगर अंचल निरीक्षक रघुनाथ प्रसाद और अनुसंधानकर्ता श्रीकांत कुमार सिन्हा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए दोनों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही और विस्तृत जांच शुरू करने का आदेश दिया है।