
प्राथमिकी दर्ज करने में देरी और आरोपी को बिना वैधानिक प्रक्रिया के थाना लाने-छोड़ने का आरोप, आईजी ने की कार्रवाई
गया। पंचानपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग से जुड़े गंभीर आपराधिक मामले में कर्तव्य के प्रति प्रथमदृष्टया लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता पाए जाने पर पंचानपुर थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिस पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र, गया के निर्देश पर की गई है। निलंबित पुलिसकर्मियों में पु०अ०नि० सह थानाध्यक्ष पद्माकर उपाध्याय, प्रभारी थानाध्यक्ष पु०अ०नि० नगिना उरांव और पु०स०अ०नि० संतोष कुमार शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, 10 अगस्त को एक महिला ने शिकायत देकर बताया कि उसकी नाबालिग पुत्री छह अगस्त की दोपहर घर से बाजार जाने के लिए निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। काफी खोजबीन के बाद भी जानकारी नहीं मिलने पर सात अगस्त को पंचानपुर थाना में लिखित आवेदन दिया गया। उसी दिन करीब 11:45 बजे नाबालिग घर वापस लौटी। परिजनों के पूछने पर उसने एक युवक पर डराने-धमकाने और बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाने तथा गलत काम करने का आरोप लगाया।
शिकायत के अनुसार, इसके बाद परिजनों ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए थाना में आवेदन दिया। आरोप है कि आठ अगस्त को पुलिस ने आरोपी नीरज कुमार को पंचानपुर बाजार स्थित उसकी दुकान से थाना लाया, लेकिन अगले दिन उसे छोड़ दिया गया। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के लिए पुलिस निरीक्षक को निर्देशित किया गया। बाद में प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई शुरू की गई।
थाना दैनिकी में नहीं की गई प्रविष्टि
जांच रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा में प्रथमदृष्टया कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। पुलिस के मुताबिक, घटना से संबंधित सूचना मिलने के बावजूद आईजी के हस्तक्षेप से पहले प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई और न ही तत्काल विधिसम्मत कार्रवाई की गई। जांच में यह भी पाया गया कि आरोपी को आठ अगस्त को बिना प्राथमिकी दर्ज किए थाना लाया गया था, लेकिन उसे थाना लाने और बाद में छोड़े जाने की थाना दैनिकी में प्रविष्टि नहीं की गई।
पुलिस के अनुसार, संबंधित व्यक्ति को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना तथा वरीय पदाधिकारी को समुचित सूचना दिए बिना थाना में रातभर रखा गया और बाद में मुक्त कर दिया गया। इस मामले को पुलिस महानिरीक्षक ने गंभीरता से लेते हुए इसे कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही माना।
तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश
प्रथमदृष्टया गंभीर कदाचार पाए जाने पर तीनों पुलिस पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में तीनों का मुख्यालय पुलिस केंद्र, गया निर्धारित किया गया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया गया है।
पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र ने स्पष्ट किया कि बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही, कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी अथवा प्राथमिकी दर्ज करने में अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में पीड़ित की सुरक्षा, त्वरित एवं विधिसम्मत कार्रवाई, निष्पक्ष अनुसंधान और न्याय सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक, गया को सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई तत्काल और निष्पक्ष रूप से सुनिश्चित कराने तथा अनुसंधान का प्रभावी पर्यवेक्षण करने का निर्देश दिया गया है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी द्वारा थाना पहुंचकर मामले की समीक्षा एवं पर्यवेक्षण किए जाने की भी जानकारी दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पीड़ित को न्याय दिलाने में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी।













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