तीन साल बाद भी अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सका जफरेन पईन, विभागीय पत्राचार बना कागजी कार्रवाई?

फतेहपुर प्रखंड क्षेत्र के किसानों के लिए महत्वपूर्ण जफरेन पईन आज भी अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस संबंध में लघु सिंचाई विभाग द्वारा वर्षों पहले अंचल प्रशासन को पत्र भेजकर कार्रवाई का अनुरोध किया गया था, लेकिन अब तक पईन को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जा सका है।

कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई प्रमंडल, गया द्वारा अंचलाधिकारी फतेहपुर को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि जफरेन पईन सिंचाई योजना के जीर्णोद्धार का कार्य प्रस्तावित है। लेकिन पईन पर अतिक्रमण होने के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। विभाग ने अपने पत्र में यह भी बताया है कि अतिक्रमण हटाने के लिए पूर्व में भी कई बार अनुरोध किया जा चुका है।

दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2023 में अंचल प्रशासन को पत्र भेजकर जफरेन पईन को अतिक्रमण मुक्त कराने का अनुरोध किया गया था। इसके बावजूद करीब तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एक सरकारी विभाग के कार्यपालक अभियंता द्वारा भेजे गए पत्रों पर वर्षों तक कार्रवाई नहीं हो पा रही है, तो आम जनता द्वारा दिए जाने वाले आवेदनों की स्थिति क्या होती होगी। सरकारी कार्यालयों में जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण के दावे अक्सर किए जाते हैं, लेकिन जफरेन पईन का मामला इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जफरेन पईन कई गांवों की सिंचाई व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। यदि इसका जीर्णोद्धार हो जाए तो किसानों को काफी लाभ मिलेगा। लेकिन अतिक्रमण हटाने में प्रशासनिक उदासीनता के कारण योजना वर्षों से अधर में लटकी हुई है।

लघु सिंचाई विभाग ने अपने ताजा पत्र में अंचलाधिकारी से स्थल का सीमांकन कराकर अतिक्रमण हटाने का अनुरोध किया है, ताकि जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया जा सके। अब देखना यह है कि इस बार प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह पत्र भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाता है।

जफरेन पईन का मामला प्रशासनिक कार्यशैली और शिकायत निस्तारण प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। किसानों और स्थानीय लोगों की निगाहें अब अंचल प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।