बिहार में सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया रील्स बनाने पर सख्ती, शिक्षा विभाग ने जारी किया निर्देश

पटना। बिहार में सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया पर रील्स और वीडियो बनाने को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने सरकारी स्कूल परिसरों में रील्स और वीडियो बनाने तथा उन्हें इंस्टाग्राम, फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। बिना सक्षम प्राधिकार की अनुमति के शिक्षक और कर्मचारी इस तरह के वीडियो नहीं बना सकेंगे।

शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी स्कूल परिसर को सोशल मीडिया कंटेंट बनाने का मंच नहीं बनाया जा सकता। विभाग ने इसे सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़ा मामला बताया है। साथ ही बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली संशोधन, 2026 के नियम-9 (3) का भी हवाला दिया गया है।

निर्देश के अनुसार, सरकारी शिक्षक और कर्मचारी सोशल मीडिया के माध्यम से राजनीतिक, धार्मिक एवं जातिगत मुद्दों पर किसी प्रकार का अभियान नहीं चला सकेंगे। विभाग ने इस तरह की गतिविधियों को पूरी तरह प्रतिबंधित बताया है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66ई और 72 के संभावित उल्लंघन को लेकर भी चिंता जताई गई है।

इस संबंध में शिक्षा विभाग के निदेशक प्रशासन विजय कुमार पाण्डेय ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश भेजा है। विभाग ने निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा है। इस आदेश के बाद सरकारी स्कूलों में सोशल मीडिया रील्स और वीडियो बनाने वाले शिक्षकों एवं कर्मचारियों की गतिविधियों पर सख्ती बढ़ने की संभावना है।