
गया। गंभीर मामले के अनुसंधान में लापरवाही बरतने के आरोप में बोधगया थाना के अनुसंधानकर्ता पुअनि राकेश कुमार सिंह को पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र, गया ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का भी आदेश दिया गया है।
मामला बोधगया थाना कांड संख्या 462/2026 से जुड़ा है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 8 सितंबर 2026 को रेखा देवी, पति हिरालाल यादव, ग्राम मोचारिम, थाना बोधगया ने पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में आवेदन देकर बताया था कि उनके पति के साथ मारपीट की गई थी। इलाज के लिए उन्हें पीएचसी बोधगया में भर्ती कराया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए मगध मेडिकल गया और बाद में आईजीआईएमएस पटना रेफर किया गया।
आवेदन के आधार पर बोधगया थाना में मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया। मामले के प्राथमिकी अभियुक्त साधु यादव को 3 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इसके बाद अभियुक्त के जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अनुसंधानकर्ता पुअनि राकेश कुमार सिंह से केस डायरी एवं जख्म जांच प्रतिवेदन की मांग की। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, अनुसंधानकर्ता द्वारा संबंधित दस्तावेज न्यायालय को उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके बाद अभियुक्त को जमानत मिल गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक ने जांच बोधगया के अंचल पुलिस निरीक्षक से कराई। जांच में पाया गया कि अनुसंधानकर्ता द्वारा 30 अगस्त 2026 को केस डायरी के कुछ पृष्ठ ही न्यायालय को सौंपे गए थे और जख्म जांच प्रतिवेदन भी उपलब्ध नहीं कराया गया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, न्यायिक हिरासत में बंद प्राथमिकी अभियुक्त को न्यायिक प्रक्रिया में लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अनुसंधान में शिथिलता बरतने की बात सामने आई। इसे पुलिस संगठन की निष्पक्षता, विश्वसनीयता एवं जनविश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कृत्य माना गया।
इसके बाद पु0अ0नि0 राकेश कुमार सिंह को सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, गया निर्धारित किया गया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया गया है।
पुलिस महानिरीक्षक, मगध क्षेत्र ने स्पष्ट किया है कि गंभीर आपराधिक मामलों के अनुसंधान में गुणवत्ता, निष्पक्षता और जवाबदेही से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। लापरवाही या संदिग्ध कार्यशैली पाए जाने पर संबंधित पुलिस पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।












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