
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुशवाहा ने बड़ी कार्रवाई की है। अहियापुर थाना में तैनात रहे घूसखोर दारोगा सदरे आलम को विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद गुरुवार को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
बताया जाता है कि सदरे आलम वर्तमान में वैशाली जिला पुलिस बल में तैनात था और हाजीपुर औद्योगिक थाना में उसकी पोस्टिंग थी। बर्खास्तगी का आदेश जारी करते हुए डीआईजी कार्यालय से इसका पत्र वैशाली एसपी को भेज दिया गया है।
रंगेहाथ पकड़ा गया था दारोगा
मामला 30 सितंबर 2021 का है, जब निगरानी विभाग की विशेष टीम ने जीरोमाइल चौक के पास एक चाय दुकान पर कार्रवाई करते हुए दारोगा सदरे आलम को 11 हजार रुपये घूस लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। यह रकम सिपाहपुर की महिला तबस्सुम आरा से वसूली जा रही थी।
केस में राहत दिलाने के नाम पर वसूली
जानकारी के अनुसार, तबस्सुम आरा का पुत्र एक मामले में फंसा हुआ था। इसी का फायदा उठाकर दारोगा सदरे आलम ने उसे राहत दिलाने और दोबारा गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर महिला पर दबाव बनाकर रिश्वत की मांग की थी। परेशान महिला ने इसकी शिकायत निगरानी विभाग से की। शिकायत के सत्यापन के बाद टीम ने जाल बिछाया और आरोपी दारोगा को रंगेहाथ पकड़ लिया।
जमानत के बाद फिर ज्वाइन, लेकिन जांच जारी रही
गिरफ्तारी के बाद सदरे आलम जेल गया, हालांकि जमानत पर रिहा होने के बाद उसने फिर से मुजफ्फरपुर जिला बल में योगदान दे दिया। इसी बीच उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई। बाद में उसका स्थानांतरण वैशाली कर दिया गया, जहां वह सेवा में बना रहा।
5 साल चली जांच, आखिरकार हुई कार्रवाईमामले की विभागीय जांच की जिम्मेदारी डीएसपी पूर्वी को सौंपी गई थी। करीब पांच वर्षों तक चली जांच और सुनवाई के बाद संचालन पदाधिकारी ने उसे दोषी ठहराया। रिपोर्ट से सहमति जताते हुए डीआईजी ने सख्त फैसला लिया।
मामले की विभागीय जांच की जिम्मेदारी डीएसपी पूर्वी को सौंपी गई थी। करीब पांच वर्षों तक चली जांच और सुनवाई के बाद संचालन पदाधिकारी ने उसे दोषी ठहराया। रिपोर्ट से सहमति जताते हुए डीआईजी ने सख्त फैसला लिया।
डीआईजी का कड़ा संदेश
डीआईजी चंदन कुशवाहा ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि सदरे आलम जैसे भ्रष्ट पुलिसकर्मी का विभाग में बने रहना न सिर्फ आम जनता बल्कि अन्य पुलिसकर्मियों के लिए भी गलत संदेश देता है। ऐसे कर्मियों के लिए पुलिस विभाग में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
आदेश में कहा गया कि विभागीय जांच में भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने के बाद एसआई सदरे आलम को 2 अप्रैल 2026 से तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया जाता है।
इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी और सख्त पहल के रूप में देखा जा रहा है।












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