
खिजरसराय (गया)। खिजरसराय थाना क्षेत्र के नौबतपुर गांव की महिला रंजू देवी की मौत के बाद निजी क्लीनिक में हुए हंगामे और तोड़फोड़ के मामले में नया मोड़ आ गया है। क्लीनिक संचालिका डॉ. अनीता कुमारी ने परिजनों द्वारा लगाए गए डीएनसी के दौरान लापरवाही के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि महिला की मौत डीएनसी से नहीं, बल्कि अत्यधिक रक्तस्राव (हेवी ब्लीडिंग) और शरीर में खून की गंभीर कमी के कारण हुई।
डॉ. अनीता कुमारी ने बताया कि शुक्रवार की शाम रंजू देवी को गंभीर हालत में उनके क्लीनिक लाया गया था। परिजनों से पूछताछ के दौरान जानकारी मिली कि महिला ने कुछ दिन पहले गर्भपात की दवा का सेवन किया था, जिसके बाद लगातार अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। महिला की स्थिति को देखते हुए उसे जांच के लिए ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया, लेकिन वहां न तो उसे बेहोशी की दवा दी गई और न ही डीएनसी की कोई प्रक्रिया की गई।
डॉक्टर के अनुसार, जांच में महिला के शरीर में खून की भारी कमी पाई गई। उन्होंने तत्काल ब्लड चढ़ाने और उच्च स्तरीय उपचार कराने की सलाह दी, लेकिन परिजन महिला को अपने साथ घर ले गए और अगले दिन वापस लाने की बात कही। उनका कहना है कि शनिवार को जब परिजन दोबारा महिला को क्लीनिक लेकर पहुंचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
गौरतलब है कि महिला की मौत के बाद शनिवार को आक्रोशित परिजनों ने क्लीनिक पहुंचकर जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की थी। परिजनों का आरोप है कि डीएनसी के दौरान बरती गई लापरवाही के कारण महिला की जान गई। हालांकि क्लीनिक संचालिका ने इन आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन करते हुए कहा कि क्लीनिक में डीएनसी की कोई प्रक्रिया नहीं की गई थी।
फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। मृतका के परिजन डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, जबकि डॉक्टर सभी आरोपों से इनकार कर रही हैं। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।













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