
गया जिले के फतेहपुर प्रखंड में गुरुवार को आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम के तहत साइबर अपराध से बचाव, डिजिटल वित्तीय साक्षरता और सुरक्षित डिजिटल लेन-देन को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें प्रतिभागियों को ऑनलाइन ठगी से बचने के उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही, आम लोगों तक वित्तीय समावेशन योजनाओं का लाभ पहुंचाने और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बैंकिंग के सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के निर्देशानुसार 21 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक वित्तीय समावेशन योजनाओं को लेकर संतृप्तिकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत पात्र लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने, बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और वित्तीय धोखाधड़ी के प्रति जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को साइबर ठगी के विभिन्न तरीकों, फर्जी कॉल और संदेश, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी तथा डिजिटल भुगतान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया गया। उन्हें सलाह दी गई कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अनजान ऐप डाउनलोड करने से भी बचें।
साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करने अथवा www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई।
इस दौरान विकास मित्रों एवं स्वच्छता पर्यवेक्षकों से अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में ग्रामीण परिवारों के बीच साइबर सुरक्षा और डिजिटल वित्तीय साक्षरता के प्रति जागरूकता फैलाने की अपील की गई। साथ ही, पात्र लाभार्थियों को वित्तीय समावेशन योजनाओं से जोड़ने और सुरक्षित डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया।
कार्यशाला में स्टेट कोऑर्डिनेटर (एमएससी) राहुल कुमार, आकांक्षी प्रखंड फेलो (एबीएफ) वंदना प्रभात, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर (एलएसबीएम) रविकांत मिश्रा सहित फतेहपुर प्रखंड की सभी पंचायतों के विकास मित्र एवं स्वच्छता पर्यवेक्षक उपस्थित रहे।
कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों से अभियान को सफल बनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई।













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