
हाजीपुर टाउन थाना में तैनात रही पूर्व महिला सब-इंस्पेक्टर पूनम कुमारी को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेना भारी पड़ गया। निगरानी की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त अवधि तक जेल में रहना होगा।
यह मामला वर्ष 2024 का है, जब पूनम कुमारी हाजीपुर टाउन थाना में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत थीं। आरोप था कि उन्होंने एक बस सेवा के प्रबंधक की जब्त बस को छोड़ने के लिए जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) को अनुशंसा भेजने के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद स्पेशल विजिलेंस यूनिट (एसवीयू) और निगरानी विभाग ने मामले का सत्यापन किया। शिकायत सही पाए जाने पर 14 नवंबर 2024 को जाल बिछाकर कार्रवाई की गई। निगरानी टीम ने हाजीपुर स्थित उनके आवास पर छापेमारी कर शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये लेते हुए उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। कार्रवाई के दौरान रिश्वत के रंग लगे नोट भी बरामद किए गए थे।
गिरफ्तारी के बाद मामले की विस्तृत जांच की गई और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और निगरानी टीम द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को अदालत ने महत्वपूर्ण माना। इसके आधार पर विशेष अदालत ने पूनम कुमारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि कानून और न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार करना समाज और व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है ताकि जनता का विश्वास कायम रह सके।
यह फैसला एक बार फिर यह संदेश देता है कि रिश्वत की छोटी से छोटी रकम भी सरकारी अधिकारियों के लिए बड़ी कानूनी परेशानी का कारण बन सकती है और भ्रष्टाचार के मामलों में कानून का शिकंजा अंततः दोषियों तक पहुंचता है।













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