रिश्वत के जाल में फंसा दारोगा, डॉक्टर की सूझबूझ से हुआ बड़ा खुलासा।

राजगीर में तैनात एक पुलिस अवर निरीक्षक का भ्रष्टाचार उस वक्त बेनकाब हो गया, जब एक डॉक्टर ने हिम्मत दिखाते हुए निगरानी विभाग से संपर्क किया। मामला सिर्फ 90 हजार रुपये की रिश्वत का नहीं, बल्कि उस सिस्टम की परतें खोलता है जहां एक निर्दोष को केस के नाम पर दबाव में लाने की कोशिश की जा रही थी।

डॉक्टर संजय कुमार सिंह, जो एक स्थानीय अस्पताल से जुड़े हैं, खुद को झूठे केस में फंसाया हुआ बता रहे थे। उनका आरोप है कि केस डायरी तैयार करने और जब्त लाइसेंसी पिस्टल को रिलीज करने के नाम पर उनसे लगातार पैसे की मांग की जा रही थी। बार-बार फोन कर दबाव बनाया गया कि बिना पैसे कोई काम संभव नहीं है।

लेकिन इस बार कहानी अलग मोड़ लेती है। डॉक्टर ने झुकने के बजाय पूरी बातचीत और मांग की जानकारी पटना के निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को दे दी। शिकायत की पुष्टि होते ही अधिकारियों ने एक सुनियोजित जाल बिछाया।

शनिवार को तय योजना के तहत डॉक्टर को अलग-अलग लोकेशन पर बुलाया गया, ताकि शक न हो। आखिरकार जब गाड़ी रिलायंस ट्रेंड्स के पास रुकी और आरोपी दारोगा पैसे लेने के लिए अंदर बैठा, उसी क्षण सादे कपड़ों में मौजूद टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।

इस कार्रवाई ने न सिर्फ एक आरोपी को गिरफ्तार किया, बल्कि यह भी दिखाया कि अगर पीड़ित हिम्मत दिखाए तो सिस्टम के अंदर छिपे भ्रष्टाचार को उजागर किया जा सकता है। अब आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और उसे विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा।इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हलचल है, वहीं आम लोगों के बीच यह संदेश गया है कि शिकायत करने पर कार्रवाई संभव है।