
बिहार के गया जिले से पुलिसिया कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सिन्धुगढ़ थाना प्रभारी निलेश कुमार पर नौडीहा झुरांग पंचायत के पूर्व पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि आशीष कुमार ने सादे लिबास में रोककर मारपीट करने, जातिसूचक पूछताछ करने और झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित ने इस संबंध में वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच, न्याय तथा दोषी अधिकारी की बर्खास्तगी की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
पीड़ित आशीष कुमार के अनुसार, घटना 4 फरवरी 2026 की शाम लगभग 7:00 बजे की है। वे अपने चचेरे भाई से मिलने हेमडीह गांव जा रहे थे। इसी दौरान सांवरचक मोड़ के पास बाइक सवार दो अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें रोका। आरोप है कि दोनों व्यक्ति सादे कपड़ों में थे और खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए पहले उनकी जाति पूछी। इसके बाद बिना किसी कारण के उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।
आशीष कुमार का कहना है कि इस हमले में उनकी बाईं आंख और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। कुछ देर बाद एक पुलिस वाहन वहां पहुंचा और उन्हें जबरन सिन्धुगढ़ थाना ले जाया गया। पीड़ित के अनुसार, थाने पहुंचने पर उन्हें पता चला कि मारपीट करने वालों में स्वयं थाना प्रभारी निलेश कुमार शामिल थे।
साजिश और मानसिक प्रताड़ना का आरोप
आशीष कुमार ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि थाना परिसर में उन्होंने थाना प्रभारी को किसी व्यक्ति से फोन पर यह कहते सुना—
“आपके कहने पर आशीष को उठा लिया है, ताकि वह आपके खिलाफ न जा सके।”
पीड़ित का कहना है कि वे एक जनप्रतिनिधि से जुड़े व्यक्ति हैं तथा ठेकेदारी और पीडीएस संचालन से संबंधित कार्य करते हैं। इसके बावजूद उन्हें जानबूझकर ‘शराब और बालू माफिया का लाइनर’ बताकर मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके विरुद्ध जिले के किसी भी थाने में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
थानाध्यक्ष की सफाई: आरोप निराधार
दूसरी ओर, सिन्धुगढ़ थाना प्रभारी निलेश कुमार ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि—पुलिस दल नियमित गश्ती पर था।
रात करीब 10:30 बजे आशीष कुमार को संदिग्ध अवस्था में बार-बार आवाजाही करते देखा गया।
बालू एवं शराब तस्करी के लाइनर होने के संदेह में पूछताछ के लिए उन्हें थाने लाया गया।
हेल्मेट नहीं पहनने के कारण मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान किया गया और रात 11:25 बजे उन्हें छोड़ दिया गया।
मारपीट के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि थाना परिसर में लगे CCTV कैमरे इसकी पुष्टि करते हैं कि कोई हिंसा नहीं हुई।
आंख में आई चोट को लेकर उन्होंने आशंका जताई कि यह पहले से मौजूद किसी संक्रमण (इन्फेक्शन) का परिणाम हो सकता है।
SSP की भूमिका पर टिकी नजर
एक ओर पीड़ित की सूजी हुई आंख और शरीर पर मौजूद चोटों के निशान पुलिसिया बर्बरता की ओर इशारा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस इसे महज सामान्य पूछताछ और ट्रैफिक नियम उल्लंघन का मामला बता रही है। अब इस पूरे प्रकरण में वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा की जाने वाली जांच और संभावित कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।











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