बोधगया विधानसभा सीट पर दस उम्मीदवारों में कड़ा मुकाबला, लालटेन बनाम हेलीकॉप्टर पर सबकी नज़र

गया (बिहार): आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में गया जिले की 229—बोधगया (अनुसूचित जाति आरक्षित) विधानसभा सीट इस बार भी राजनीतिक दलों और मतदाताओं के लिए केंद्र बिंदु बनी हुई है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार इस सीट से कुल 10 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें राष्ट्रीय दलों के साथ क्षेत्रीय और निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

राष्ट्रीय और प्रमुख दलों के उम्मीदवार

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से वर्तमान विधायक कुमार सर्वजीत को पुनः टिकट दिया गया है। वे ग्राम मस्तीपुर, थाना बोधगया के निवासी हैं। पार्टी के पारंपरिक प्रतीक “लालटेन” के सहारे वे एक बार फिर मतदाताओं के बीच विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर समर्थन मांग रहे हैं।

वहीं लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) की ओर से श्यामदेव पासवान चुनाव मैदान में हैं। उन्हें “हेलीकॉप्टर” चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। वे पार्टी संस्थापक राम विलास पासवान की विचारधारा को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं और अपने क्षेत्र में विकास एवं समान अधिकार को मुख्य मुद्दा बना रहे हैं।

क्षेत्रीय दलों का प्रभाव और नए चेहरे

रजिस्ट्रीकृत (गैर-मान्यता प्राप्त) राजनीतिक दलों की बात करें तो

विकास वंचित इंसान पार्टी से अशोक कुमार पासवान “पानी का जहाज” प्रतीक पर चुनाव लड़ रहे हैं। वे सामाजिक न्याय और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की बात कर रहे हैं।

पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) से उदय दास “फलों से युक्त टोकरी” चिन्ह पर मैदान में हैं। वे युवाओं की बेरोज़गारी और महिला सुरक्षा को लेकर सक्रिय हैं।

जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार लक्ष्मण मांझी “स्कूल का बस्ता” प्रतीक लेकर जनता से शिक्षा, रोजगार और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता के मुद्दों पर समर्थन मांग रहे हैं।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रत्याशी वीरेन्द्र राजवंशी उर्फ विगेन्द्र कुमार “छड़ी” चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में हैं। वे अनुसूचित जाति के लोगों के हक और सामाजिक समानता को लेकर मुखर हैं।

मूलनिवासी समाज पार्टी से सुगिया देवी “एअरकंडिशनर” प्रतीक के साथ चुनाव लड़ रही हैं। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास उनका प्रमुख एजेंडा है।

निर्दलीय प्रत्याशी भी दे रहे चुनौती

इस बार तीन निर्दलीय उम्मीदवार भी जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में हैं।

कुमार प्रदीप को “अलमारी।

नंदलाल कुमार को “कड़ाही।

और रामस्वरूप रिशीयासन को “मोतियों का हार” चुनाव चिन्ह मिला है।

निर्दलीय उम्मीदवार अपने-अपने स्थानीय मुद्दों जैसे सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा को प्रमुख विषय बना रहे हैं।

मुकाबला बना दिलचस्प

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार बोधगया सीट पर मुकाबला एकतरफा नहीं है।
राजद के कुमार सर्वजीत को जहां अपने पिछले कार्यकाल और संगठन की मजबूती का लाभ मिल सकता है, वहीं एलजेपी (राम विलास) के श्यामदेव पासवान और जन सुराज पार्टी के लक्ष्मण मांझी भी वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करने में लगे हैं।

जातीय समीकरणों के साथ-साथ इस बार युवाओं, बेरोजगारी और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे भी चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं। ग्रामीण इलाकों में पानी, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर जनता के सवाल भी उम्मीदवारों को जवाब देने पर मजबूर कर रहे हैं।

मतदाताओं में उत्साह

बोधगया क्षेत्र के मतदाताओं में चुनाव को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।गांव-गांव में नुक्कड़ सभाएँ, पदयात्राएँ और सोशल मीडिया प्रचार तेज हो चुका है।
लोग उम्मीद जता रहे हैं कि इस बार का विधायक उनके क्षेत्र के विकास के लिए ठोस पहल करेगा।