
गया जिले में फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई में लगातार हो रही देरी को लेकर प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत दर्ज एक परिवाद की सुनवाई के बाद लोक प्राधिकार-सह-जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), गया के विरुद्ध ₹2500 का अर्थदंड लगाए जाने की अनुशंसा की गई है। साथ ही राज्य अपीलीय प्राधिकार, शिक्षा विभाग, पटना द्वारा पारित आदेश का एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से अनुपालन करने का अंतिम निर्देश दिया गया है।
यह मामला परिवादी नागेश्वर प्रसाद द्वारा दायर परिवाद से जुड़ा है। परिवाद में आरोप लगाया गया था कि विद्यालय में कार्यरत फर्जी शिक्षक संगीता, विनोद कुमार एवं रेणु कुमारी को अब तक न तो सेवा से निष्कासित किया गया है और न ही उनसे अवैध रूप से आहरित मानदेय की वसूली की गई है। परिवादी ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस संबंध में राज्य अपीलीय प्राधिकार, शिक्षा विभाग, पटना द्वारा वाद संख्या 17/2024 में स्पष्ट आदेश पारित किया जा चुका है, बावजूद इसके जिला स्तर पर उसका अनुपालन नहीं किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान लोक प्राधिकार को नोटिस जारी कर प्रतिवेदन मांगा गया। इसके जवाब में डीपीओ (स्थापना), गया की ओर से कार्यालय पत्रांक 1267, दिनांक 27 सितंबर 2025 के माध्यम से बताया गया कि संबंधित प्रतिवादी शिक्षकों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में सिविल रिट जूरिस्डिक्शन केस संख्या 12791/2025 दायर किया गया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है। प्रशासन ने इसी आधार पर आदेश के अनुपालन में देरी का तर्क दिया।
हालांकि परिवादी ने स्पष्ट रूप से अवगत कराया कि उक्त रिट याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा किसी भी प्रकार का स्थगन आदेश पारित नहीं किया गया है। अभिलेखों के परीक्षण के दौरान भी यह तथ्य पुष्ट हुआ कि राज्य अपीलीय प्राधिकार के आदेश के अनुपालन पर कोई विधिक रोक या प्रतिबंध नहीं है।
निर्णय में कहा गया है कि मात्र रिट याचिका लंबित होने का हवाला देकर आदेश के अनुपालन से स्वयं को विरत रखना विधिसम्मत नहीं है। आदेश में यह भी टिप्पणी की गई कि लोक प्राधिकार द्वारा वास्तविक स्थिति से संबंधित कार्यालय को सही जानकारी न देकर भ्रमित करने का प्रयास किया गया, जो न केवल खेदजनक है बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का परिचायक भी है।
गौरतलब है कि पूर्व में लोक प्राधिकार को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि एक सप्ताह के भीतर राज्य अपीलीय प्राधिकार, शिक्षा विभाग, पटना द्वारा वाद संख्या 17/2024 में पारित आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए, अन्यथा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी। इसके बावजूद अगली सुनवाई की तिथि तक न तो आदेश का अनुपालन किया गया और न ही कोई अनुपालन प्रतिवेदन समर्पित किया गया।
इन तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए लोक प्राधिकार-सह-जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), गया के विरुद्ध कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप में ₹2500 का अर्थदंड लगाए जाने की अनुशंसा की गई है। साथ ही यह अंतिम निर्देश दिया गया है कि एक सप्ताह के भीतर हर हाल में राज्य अपीलीय प्राधिकार के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए तथा की गई कार्रवाई की सूचना सहित अनुपालन प्रतिवेदन संबंधित कार्यालय को समर्पित किया जाए।
आदेश के साथ ही मामले की कार्रवाई समाप्त कर दी गई है और निर्णय की प्रति संबंधित लोक प्राधिकार को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। प्रशासनिक हलकों में इस आदेश को फर्जी शिक्षकों के खिलाफ सख्त रुख और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।











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