
फतेहपुर।प्रखंड क्षेत्र के भारे, उत्तरी लोधवे सहित अन्य जन वितरण प्रणाली (PDS) दुकानों में उजागर हुई गंभीर अनियमितताओं पर तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से खाद्य आपूर्ति तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच रिपोर्ट में भारी मात्रा में अनाज की कमी दर्ज होने के बावजूद न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही लाइसेंस निलंबन जैसी कोई प्रभावी विभागीय कार्रवाई सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, सितंबर माह में तत्कालीन मार्केटिंग ऑफिसर चन्दन कुमार शास्त्री द्वारा की गई जांच में भारे पंचायत के पीडीएस विक्रेता राजेन्द्र यादव की दुकान से 185.25 क्विंटल चावल एवं 47.66 क्विंटल गेहूं कम पाया गया। वहीं, उत्तरी लोधवे स्थित अजय कुमार की दुकान से लगभग 350 क्विंटल अनाज की कमी दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त पहाड़पुर के जन वितरण प्रणाली दुकानदार विमल साव द्वारा लाभुकों को निर्धारित मात्रा से कम, मात्र 4 किलोग्राम अनाज दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई। उक्त सभी मामलों की जांच रिपोर्ट खाद्य आपूर्ति विभाग को सौंप दी गई थी।
जांच के बाद संबंधित मार्केटिंग ऑफिसर का तबादला कर दिया गया और 6 अक्टूबर 2025 को नए मार्केटिंग ऑफिसर मुकेश कुमार गुप्ता ने पदभार ग्रहण किया। इसके पश्चात यह मामला मानो ठंडे बस्ते में डाल दिया गया हो।
स्थानीय स्तर पर आरोप लग रहे हैं कि संबंधित पीडीएस विक्रेताओं को कथित प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है। आरोपों की गंभीरता इस तथ्य से और बढ़ जाती है कि जिन पर गरीबों के हिस्से का अनाज हड़पने का आरोप है, वही अब कथित तौर पर विभागीय तंत्र के भीतर ‘वसूली’ में सक्रिय बताए जा रहे हैं।
वहीं इस मामले में फतेहपुर प्रखंड के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी मुकेश कुमार गुप्ता से फोन के माध्यम से बात करने की कोशिश की गई, उनका फोन बंद बता रहा था। वही व्हाट्सएप के माध्यम से जानकारी लेने की कोशिश की गई। हालांकि उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
प्रशासनिक पक्ष जानने के लिए जब संवाददाता ने सदर अनुमंडल पदाधिकारी से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित दुकानदारों से स्पष्टीकरण मांगा गया है तथा मामला जांचाधीन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोष सिद्ध होने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, सवाल यह है कि स्पष्ट आंकड़ों और ठोस जांच रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई में यह असामान्य देरी क्यों हो रही है? क्या विभागीय मेहरबानी यूं ही जारी रहेगी, या फिर गरीबों के हक के अनाज से जुड़े इस गंभीर मामले में समयबद्ध और कठोर कदम उठाए जाएंगे? जवाब का इंतजार है।












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