
नवादा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। अकबरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में 75 वर्षीय महिला केशरी देवी की मौत के बाद परिजनों को एम्बुलेंस नहीं मिली। मजबूरन उन्हें शव को स्ट्रेचर पर रखकर दो किलोमीटर दूर अपने घर तक ले जाना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इलाज के दौरान हुई मौत, एम्बुलेंस की मांग ठुकराई
अकबरपुर बाजार निवासी रामचंद्र सहनी की पत्नी केशरी देवी का इलाज PHC में चल रहा था। रविवार देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने शव को घर ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन से एम्बुलेंस की मांग की, लेकिन अस्पताल कर्मियों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि मृतकों के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है।
स्ट्रेचर देने से पहले पत्नी और बेटे को रखा ‘बंधक’
परिजनों के अनुसार, स्ट्रेचर देने में भी अस्पताल कर्मियों ने आनाकानी की। कई बार अनुरोध करने के बाद स्ट्रेचर तो दिया गया, लेकिन अस्पताल ने एक शर्त रखी—
स्ट्रेचर वापस आने तक मृतका के बेटे और बहू को अस्पताल में ‘गारंटर’ के रूप में रुकना होगा।
परिजन बताते हैं कि रात होने के कारण उन्हें कोई वाहन भी नहीं मिला। अंततः वे बंधक बने अपने परिवार के सदस्यों की जिम्मेदारी छोड़कर मां के शव को स्ट्रेचर पर घसीटते हुए घर ले गए। स्ट्रेचर लौटाने के बाद ही अस्पताल ने उनकी पत्नी और बेटे को छोड़ा।
परिजनों का दर्द
मृतका की बहू का कहना है—
“हमने कर्मियों से इंसानियत के नाते मदद मांगी। कहा कि स्ट्रेचर वापस आने तक हम यहीं रुके रहेंगे, लेकिन कम से कम स्ट्रेचर दे दीजिए। बहुत आग्रह करने के बाद वे तैयार हुए।
मृतका के एक अन्य बेटे राजेश साव ने बताया—
“रात में एम्बुलेंस नहीं मिली। अस्पताल ने साफ कहा कि मृत्यु पर एम्बुलेंस नहीं दी जाती। मजबूरी में हमने स्ट्रेचर मांगा, लेकिन उस पर भी हमसे गारंटी माँगी गई।”
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
वीडियो वायरल होने के बाद नवादा के सिविल सर्जन डॉ. विनोद चौधरी ने बयान दिया—
PHC में उपलब्ध 102 एम्बुलेंस केवल मरीजों के लाने-ले जाने के लिए है।शव को ले जाने के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।सदर अस्पताल में शव वाहन की व्यवस्था है।उनका दावा है कि परिजनों ने शव वाहन की मांग की ही नहीं।उन्होंने यह भी कहा कि परिजन स्वयं ही स्ट्रेचर पर शव लेकर गए।
स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एम्बुलेंस न देना।
परिजनों को बंधक बनाकर रखना।
शव को स्ट्रेचर पर ले जाने की मजबूरी।
इन सबने प्रशासनिक संवेदनहीनता की तस्वीर उजागर कर दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों का खुला प्रमाण हैं और इस पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।











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